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Bihar News: छपरा सदर अस्पताल में घायलों के जख्म पर कार्टन बांधने का मामला, ड्रेसिंग व्यवस्था पर उठे सवाल

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | छपरा सदर अस्पताल में सड़क हादसे में घायल दो युवकों के जख्म पर पट्टी की जगह दवा पैकिंग का कार्टन बांधकर पटना रेफर करने का मामला सामने आया है।

छपरा, 5 अक्टूबर आलम की खबर: बिहार के छपरा सदर अस्पताल में सड़क हादसे में घायल दो युवकों के प्राथमिक उपचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि हादसे में घायल युवकों के जख्म पर चिकित्सकीय पट्टी की जगह दवा की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला कार्टन बांधकर उन्हें पटना रेफर कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद अस्पताल की ड्रेसिंग व्यवस्था और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

जानकारी के मुताबिक सोमवार को मुफस्सिल थाना क्षेत्र के लाल बाजार के पास ट्रक और बाइक के बीच टक्कर हो गई। हादसे में बाइक सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों युवक छपरा में शैडोफैक्स कंपनी के लिए डिलीवरी ब्वाय के तौर पर काम करते हैं। दुर्घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने दोनों घायलों को इलाज के लिए छपरा सदर अस्पताल पहुंचाया।

घायलों की पहचान डोरीगंज थाना क्षेत्र के मोहदीपुर गांव निवासी रंजीत चौरसिया के 24 वर्षीय पुत्र अविनाश कुमार और बदलपुर निवासी अमर सिंह के 28 वर्षीय रूप में बताई गई है। हादसे में दोनों युवकों को शरीर के अलग-अलग हिस्सों में चोटें आई थीं। परिजनों के मुताबिक अस्पताल पहुंचने के बाद दोनों का प्राथमिक उपचार किया गया।

सदर अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. सुब्रत कुमार ने दोनों घायलों का प्राथमिक उपचार किया। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए दोनों को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर करने का निर्णय लिया गया। मरीजों को पटना भेजे जाने के फैसले पर परिजनों की ओर से मुख्य आपत्ति नहीं बताई गई है। विवाद उस तरीके को लेकर है, जिस तरीके से रेफर करने से पहले घायलों के जख्मों को ढका गया।

परिजनों के अनुसार, चोट वाले स्थानों पर सामान्य चिकित्सकीय ड्रेसिंग सामग्री की जगह दवा की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला कार्टन बांधा गया। यह जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल में उपलब्ध ड्रेसिंग सामग्री और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे।

चिकित्सा व्यवस्था में घायल मरीजों के जख्म की सफाई, संक्रमण से बचाव और उचित ड्रेसिंग प्राथमिक उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में यदि वास्तव में मानक ड्रेसिंग सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद कार्टन का इस्तेमाल किया गया, तो इसके पीछे की वजह जांच का विषय है। वहीं यदि किसी विशेष परिस्थिति में ऐसा किया गया था, तो अस्पताल प्रशासन की ओर से इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।

छपरा सदर अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने का दावा किया जाता है। अस्पताल में करीब 75 प्रकार के ऑपरेशन की सुविधा होने की भी बात कही जाती है। ऐसे में सड़क हादसे जैसे गंभीर मामलों में मरीजों को रेफर करने से पहले उन्हें किस स्तर की प्राथमिक चिकित्सा और ड्रेसिंग उपलब्ध कराई गई, यह सवाल अब महत्वपूर्ण हो गया है।

यह मामला केवल दो घायलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी अस्पतालों में आपात स्थिति के दौरान उपलब्ध संसाधनों और उनके इस्तेमाल की व्यवस्था पर भी सवाल उठता है। सड़क हादसे में घायल मरीजों के लिए शुरुआती उपचार बेहद अहम होता है। गंभीर मरीज को समय पर बेहतर केंद्र भेजना जरूरी है, लेकिन रेफरल से पहले प्राथमिक उपचार भी निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप होना चाहिए।

मामले की जानकारी अस्पताल प्रशासन तक पहुंचने के बाद उपाधीक्षक डॉ. केएम दुबे ने जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जाएगी और यदि किसी स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही सामने आती है तो दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल प्रशासन के इस रुख के बाद अब जांच पर नजर रहेगी। जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि घायल युवकों के जख्म पर कार्टन किस परिस्थिति में बांधा गया, उस समय निर्धारित ड्रेसिंग सामग्री उपलब्ध थी या नहीं और यदि उपलब्ध थी तो उसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया।

इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि दोनों घायलों को गंभीर स्थिति में पटना रेफर किया गया है और अस्पताल प्रशासन ने भी मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अब जांच रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि घटना के पीछे संसाधनों की कमी थी, किसी विशेष परिस्थिति में ऐसा किया गया या फिर किसी स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही।

छपरा सदर अस्पताल में सामने आए इस मामले ने सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों और उनके परिजनों की उम्मीद यही होती है कि गंभीर स्थिति में उन्हें तत्काल और मानक के अनुरूप उपचार मिले। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

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संपादकीय विचार:

सरकारी अस्पतालों में संसाधन और सुविधाएं तभी सार्थक हैं, जब जरूरत के समय उनका इस्तेमाल मरीजों के हित में सही तरीके से हो। सड़क हादसे जैसे मामलों में प्राथमिक उपचार में किसी भी तरह की लापरवाही मरीज के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।

छपरा सदर अस्पताल के मामले में आरोप सही हैं या किसी विशेष परिस्थिति के कारण ऐसा हुआ, इसका फैसला जांच के बाद ही होना चाहिए। लेकिन अस्पताल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इमरजेंसी में ड्रेसिंग और प्राथमिक उपचार की जरूरी सामग्री हमेशा उपलब्ध रहे और मरीजों को निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुसार इलाज मिले।

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